Kavya's Blog
Thursday, February 17, 2011
इच्छा
.
हर बार कुछ नया करना चाहती हूँ
जिन्दगी को नए रंगों से भरना चाहती हूँ
बस यही सोच कर रुक जाते है हाथ मेरे
किसी और कि दुनिया न बेरंग हो जाये
Saturday, January 1, 2011
जिन्दगी
ठोकर खाने वालो ने हमको बतलाया
जिन्दगी रूकती नहीं यह समझाया
हमने कहा
माना जिन्दगी कभी रूकती नहीं
पर वो पहले जैसी भी रहती नहीं
Thursday, December 30, 2010
आँखें
समझ में मेरी कुछ भी आया नहीं
बताऊ किसको क्या कुछ छुपाया नहीं
व्यस्तता
हर किसी को अपने-अपने से काम है
कोई तो सोचे कहा छूट गई मुस्कान है
अर्श से फर्श तक
अगर हम जानते यह की
अर्श से फर्श पर उतरना
तो कभी न गिरते
सम्भल ही जाते,
चोट न खाते
अब गिरे है तो
चोट भी लगेगी,
दर्द भी होगा
लेकिन
उसे सहना होगा
और
किसी से
कुछ न कहना होगा
अकेलापन
मैं अपनी बात कुछ यूँ कहती गई,
कि किसी को कोई तकलीफ न हो,
समझ पाई न खुद अपने आपको,
बस यूँ ही अकेले चलती चली गई....
Wednesday, December 29, 2010
आँसू
आँख से बहे आँसू सब को नज़र आते है ......
पर जो नज़र नहीं आते वो दर्दनाक हो जाते है ......
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)